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अनोखी: बेकिंग का है शौक तो अपनाएं ये टिप्स निखर जाएगी कला

कुछ शौक सिर्फ समय बिताने में ही मदद नहीं करते, बल्कि वे कुछ खास होते हैं। बेकिंग एक ऐसा ही शौक है। बेकिंग के क्या-क्या हैं फायदे, बता रही हैं सुमन बाजपेयी 

जब कुछ बेक करने की बात आती है तो 


सबसे पहले केक, चॉकलेट और कुकीज आदि का ही ध्यान आता है। पर बेकिंग केवल स्वादिष्ट मीठी चीजें ही तैयार करने का माध्यम नहीं है। बेकिंग से एक प्रकार की मानसिक खुशी भी मिलती है, इसलिए उसे हॉबी के रूप में अपनाने के बहुत फायदे हो सकते हैं। मनोवैज्ञानिक शोधों से यह बात सामने आई है कि बेकिंग एक तरह की सृजनात्मकता है, जो मन को बहुत तरह से खुशी प्रदान करती है। खासकर अगर यह किसी दूसरे के लिए की जाती है। 

दूसरों की खुशी अहम है-


चाहे घर पर की जाने वाली जन्मदिन की पार्टी हो, क्रिसमस हो या शादी की सालगिरह, केक, कप केक, पुडिंग, पेस्ट्री, ब्रेड आदि की जरूरत पड़ती ही है। शहरों में लोग अब घर पर ही ये सब चीजें बनाने लगे हैं और एक तरह से ट्रेंड बनने के कारण बेकिंग ने हॉबी का रूप ले लिया है। 

यह एक ऐसी हॉबी है, जो हमारे अंदर बांटने की क्षमता को बढ़ाती है। आमतौर पर केक हो या कुकीज, हम केवल अपने लिए ही नहीं बनाते हैं। इन्हें बड़ी मात्रा में बनाया जाता है, ताकि सबके साथ बांटकर खा सकें। खुद बेक करके बनाई चीज को खिलाने के लिए जब अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या परिचितों को आमंत्रित करते हैं तो एक तरह का सुकून और खुशी मिलती है। आपकी वजह से दूसरे के चेहरे पर जब हंसी खिलती है तो उससे बड़ी खुशी आपके लिए कोई और नहीं होती। 

रचनात्मक अभिव्यक्ति है यह-


बोस्टन यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के एक प्रोफेसर इसे अपने को अभिव्यक्त व एक तरह से संवाद स्थापित करने का माध्यम मानते हैं। बेकिंग रचनात्मक रूप से स्वयं को व्यक्त करने का यह मौका देती है और इस तरह इंसान तन और मन दोनों ही तरह से स्वस्थ महसूस करता है। बेकिंग भी अन्य शौकों की तरह, तनाव से बाहर निकालने का एक जरिया है। 

तनाव से ही तमाम तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएं होती हैं और अगर इसे एक हॉबी की तरह अपना लिया जाए तो जीवन को ज्यादा बेहतर ढंग से जिया जा सकता है।इसकी वजह यह है कि बेकिंग के दौरान पूरी तरह से एकाग्र बने रहने की जरूरत होती है। इसमें सही मात्रा में मक्खन और चीनी को लेना, अंडे फेंटना, तैयार घोल को इस तरह मिलाना कि पकने के बाद कहीं गांठें न रह जाएं और वह सही तरह से फूले, खुशबू और स्वाद का ध्यान रखने के साथ-साथ उसकी सजावट के प्रति सतर्क रहना, नकारात्मक ढंग से सोचने की प्रक्रिया से बाहर रखता है। उस समय केवल अपनी बनाई चीज पर ही केंद्रित रहने के कारण तनाव कम हो जाता है। 

आर्ट थेरेपी है


असल में बेकिंग एक तरह की आर्ट थेरेपी है। बेक करके एक स्वादिष्ट चीज तैयार करना, एक सुकून देता है। जब हम विचारों से घिरे रहते हैं, तभी अवसाद और निराशा हमसे दूर रहती है। मनोवैज्ञानिक निशा सूरी कहती हैं- जब आप बेकिंग कर रहे होते हैं तो आपके मन में किसी तरह की सोच नहीं चल रही होती, क्योंकि उस दौरान आप कुछ सृजन कर रहे होते हैं। और सबसे अच्छी बात तो यह है कि आपकी बनाई चीज जब दूसरों के चेहरे पर खुशी लाती है तो इससे आप में भी एक ऊर्जा का संचार होता है। जब आप दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो इससे न केवल आप उन लोगों से जुड़ जाते हैं, बल्कि खुद के लिए भी आपका जीवन अधिक अर्थपूर्ण हो जाता है। 

आटे को मसलना, ब्लेंडर की आवाज और खुशबू, ये सारे अनुभव हमारी इंद्रियों को उत्प्रेरित करते हैं, जिसकी वजह से फील-गुड एंडोरफिंस हार्मोन में वृद्धि होती है। यही नहीं, बेकिंग एक ऐसा माध्यम है, जिससे आपको नए-नए प्रयोग करने का अवसर मिलता है। कितनी ही तरह से एक रेसिपी को बनाया जा सकता है, यह बात कुछ नया करते रहने की प्रेरणा देती है।   

निखर जाएगी बेकिंग की कला-


-‘आर्ट ऑफ बेकिंग’ पर बाजार में अनगिनत किताबें मौजूद हैं। हालांकि अधिकांश में सही जानकारी नहीं है। अगर आप बेकिंग को हॉबी बनाना चाहती हैं तो यह समझ लें कि बेक करना एक तरह का विज्ञान है, जिसे कला के साथ सजाया या आकर्षक बनाया जाता है। अगर ब्रेड या स्पंज केक बनाते समय (जिसे बाद में क्रीम, चॉकलेट या चैरी से सजाया जाएगा), उसमें सही तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अगर बेस तैयार नहीं किया गया है तो आपकी पूरी मेहनत बेकार चली जाएगी। उसके बेस को सही तकनीक से तैयार करने की जरूरत होती है।  


-कप या चम्मच का इस्तेमाल करने की बजाय मापने के लिए ग्राम या किलो का प्रयोग करें। 


-गलत ढंग से की गई मिक्सिंग बेक की गई चीजों को बेकार कर सकती है। सारी सामग्रियों को एक साथ मिलाने की बजाय, मिलाने के क्रम का पालन करें। यह समझना जरूरी है कि कुछ सामग्री डाली जाती हैं और कुछ को फेंटना होता है। अंडे व चीनी को फेंटते हुए या चीनी व क्रीम को मिक्स करते हुए ध्यान रखने की जरूरत होती है, जबकि आटे जैसे सूखे पदार्थों को केवल डालना होता है। 


-बिना ग्लूटन बेकिंग करने के लिए बाइंडिंग एजेंट न डालने से केक या पेस्ट्री ठीक नहीं बनेंगी। 


-गूंदे हुए आटे को फूलने के लिए पर्याप्त समय दें। अगर न फूलें तो चेक करें कि कहीं यीस्ट पुराना तो नहीं था। 

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