अनोखी

अनोखी: बॉडी ही नहीं मन का भी होता है डिटॉक्सिफिकेशन, ये है तरीका

देखभाल, साफ-सफाई और मरम्मत की जरूरत सबको होती है, हमारे मन को भी। कैसे करें मन का डिटॉक्सिफिकेशन, बता रही हैं डॉ. मोनिका शर्मा। शरीर की तरह ही मन को भी बीमारियां, थकान और भावनात्मक टूटन तभी घेरती है, जब समय-समय पर  उसकी संभाल नहीं होती। ऐसे में मन की मरम्मत करने के लिए नकारात्मकता और उलझनों को कोने-कोने से निकाल बाहर करना जरूरी है। 

चिंता, अवसाद, क्रोध और कितने ही नकारात्मक भावनाओं को जड़ जमाने से पहले ही उखाड़ फेंकना होता है। जैसे अनियमित खानपान और बेतरतीब जीवनशैली से बिगड़े शरीर के मिजाज को ठीक करने के लिए बॉडी को डिटॉक्स करने की जरूरत होती है, वैसे ही मन को भी डिटॉक्सिफिकेशन की दरकार होती है। इस प्रक्रिया में थोड़ा ठहराव, खुद का साथ और सोच की सही दिशा, मन को भी नकारात्मक बातों और हालातों से बाहर निकाल लाती है।

एकांत भी है जरूरी- 


आज के समय में हम चाहे-अनचाहे हमेशा एक भीड़ से घिरे रहते हैं। इसमें मन का अकेलापन तो है, लेकिन सुकून भरा एकांत नहीं। ऐसे में मन के डिटॉक्सिफिकेशन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है, एकांत। कुछ ऐसे पल, जब अपने आप की सुध ली जाए, क्योंकि मन हो या दिमाग, दिनभर हम कई उलझनों और उतार-चढ़ावों को जीते हैं। प्रतिक्रिया देते हैं,  आलोचना और सराहना जैसे कई भावों को जीते हैं। अकसर देखने में समझ नहीं आता, पर ऐसी सभी भावनाएं मन-मस्तिष्क को बहुत प्रभावित करते हैं। इसीलिए दिलो-दिमाग को संभाल व देखभाल की दरकार होती ही है।  इसके लिए ठहरकर सोचना जरूरी है। काम और आराम का संतुलन शारीरिक थकान से बचने के लिए ही नहीं, मानसिक ऊर्जा को सहेजने के लिए भी जरूरी है। मन को डिटॉक्स करने की प्रक्रिया में निकाला गया एकांत इसी संभाल का काम करता है। ऐसे सुकूनदायी लम्हे नई ऊर्जा जुटाने और मन को सेहतमंद रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।

व्यक्तित्व, व्यवहार व जीवनशैली का मूल्यांकन-


हर बार औरों को गलत समझ लेने के ख्याल से बाहर आने का रास्ता यही है कि अपने गुण-दोषों पर भी गौर  किया जाए। पर भागमभाग में उलझे रहें तो यह संभव नहीं। एक्शन और रिएक्शन की भागदौड़ में अपने ही स्वभाव को लेकर सोचने का समय नहीं बचता। ऐसे में अकसर हम खुद को हर हाल में सही ही मानने लगते हैं। गुण-दोषों का आकलन केवल दूसरों के व्यवहार तक सिमट जाता है। पर यह भी सच है कि औरों की बातों और व्यवहारगत परेशानियों का हल हमारे पास नहीं होता। पर खुद को बेहतर  बनाने या हालातों का सामना करने की कोशिश हर हाल में की जा सकती है। यही सोच मन की नकारात्मकता को दूर कर सुकून देने वाली साबित होती है। 

साथ ही स्व-मूल्यांकन की सोच हमें भावी जिंदगी के लिए भी सकारात्मक सोच की सौगात देती है। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक सर्वे  के मुताबिक, करीब 43 फीसदी  वर्कफोर्स  सप्ताह के ज्यादातर दिनों में थकान महसूस करती है । कामकाजी लोगों के इन आंकड़ों को देखकर  समझा  जा सकता है कि लोगों की कितनी बड़ी संख्या है, जिन्हें अपनी जीवनशैली का मूल्यांकन करने की जरूरत है। खुद को रिव्यू करना इस प्रक्रिया में मन की सेहत के लिए बहुत अहम है।

लीजिए  टेक्नोलॉजी  से ब्रेक-


स्मार्टफोन और आइपैड जैसे स्मार्ट गैजेट्स को बिना किसी जरूरी काम के स्क्रॉल करते रहना भी हमारे मन की सेहत के लिए ठीक नहीं है। बेवजह की सूचना और दूसरे लोगों की जिंदगी से जुड़े अपडेट्स मन पर एक अनदेखा भार बढ़ाते हैं। कभी दूसरों से पीछे छूट जाने का भाव आता है तो कभी अपनी खुशियां कम पड़ती दिखती हैं। स्क्रीन के उस ओर दिख रही या दिखाई जा रही दुनिया की सच्चाई जाने बिना ही हमारा मन अवसाद और तनाव में घिरने लगता है। ऐसे में मन की मरम्मत करने के लिए टेक्निकल डिटॉक्स  बेहद जरूरी है। समय रहते न चेते तो इन हालातों से निकलने के लिए काउंसलिंग की भी जरूरत पड़ सकती है। याद रहे कि मन को साधने के लिए भी एक प्रतिबद्धता की दरकार होती है। मन-मस्तिष्क  की सेहत को सहेजने के लिए गैजेट्स की जरूरत और लत का फर्क समझना बेहद जरूरी है। गैजेट्स से दूर होना ही काफी नहीं, इनसे बचाये हुए समय को रचनात्मक कार्य में लगाना भी जरूरी है।

बचाएगा प्यार और आभार   


हालिया बरसों में हमारे यहां भी रिश्तों से लेकर कामकाज के संसार तक उलझनों का साम्राज्य बढ़ा है। बीते समय के घाव और आने वाले समय की चिंता जीवन के साथ चाहे-अनचाहे कदमताल करती रहती हैं। भूत और  भविष्य  से जुड़ी बातें वर्तमान की ऊर्जा सोख लेती हैं। इनसे मुक्ति पाने के लिए मन को समय-समय पर इस बोझ से  मुक्त करना जरूरी है। इस काम में आभार और प्रेम का भाव मददगार बन सकता है। बीते समय में  कुछ पाने-खोने और आने वाले सालों में आपकी झोली में क्या आयेगा या नहीं आएगा की उलझनों के बीच एक पहलू आज का भी होता है। आज में जीते हुए जो कुछ आपके हिस्से है, उसके प्रति आभारी होने का एहसास कई तकलीफों से बाहर निकालता है और मन को सहज रखता है। 

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