अल्मोड़ा

अल्मोड़ा: अल्मोड़ा के मंदिरों में नहीं पहुंच रहे लोग

बुधवार यानि द्वितीय नवरात्र ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। इसका अर्थ तप का आचरण करने वाली होता है। देवी का यह स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इस दिन देवी का व्रत रखने वाले की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं। लेकिन अल्मोड़ा में लॉकडाउन के चलते नवरात्र के दूसरे दिन भी अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद रहे। इस दौरान भक्त बाहर से ही पूजा-अर्चना कर वापस घरों को लौट गये। वहीं नगर के नंदादेवी तथा उल्का देवी मंदिरों में दो से चार श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करते दिखाई दिये। व्रत रखकर लोग सुबह सवेरे ही रघुनाथ मंदिर, मुरलीमनोहर, हनुमान मंदिर, भैरव मंदिर, सिद्धिनौला, बद्रीनाथ मंदिर, रत्नेश्वर, बद्रेश्वर मंदिर, उल्का देवी, जाखनदेवी, रामशिला मंदिर, शै:भैरव मंदिर, डोलीडाना, कसार देवी, स्याही देवी, वानर देवी मंदिर पहुंचे लेकिन कपाट बंद होने के चलते बाहर से ही पूजा अर्चना कर अपने घरों को लौट गये। नगर के त्रिपुरासुंदरी व नंदादेवी मंदिर में दो से चार महिलाओं को पूजा-अर्चना करते देखा गया।

नंदादेवी मंदिर के पुजारी लीलाधर जोशी ने बताया कि पहले ही लोगों का मंदिरों में आना कम हो गया था। लेकिन सरकार की ओर से जो तीन घंटे का समय दिया जा रहा है उसमें भी श्रद्धालुओं बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं।गायत्री मंदिर में विश्व कल्याण के लिए यज्ञ शुरूअल्मोड़ा। नगर के गायत्री प्रज्ञा पीठ लिंक रोड में बीते कई दिनों से कोरोना वायरस के नाश तथा महामारी से बचने के लिए पूरे भारतवर्ष और विश्व उन्मूलन के लिए यज्ञ में आहूतियां दी जा रही हैं। इसके तहत इस महामारी के दौरान सेवा दे रहे कोरोना योद्धाओं जिनमें डॉक्टरों, नर्सों, मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मियों, पुलिस, पैरा मिलिट्री फोर्सेज, दुकानदारों, भोजन व्यवस्था कर रहे सरकारी, गैर सरकारी, लोकसेवियों, एनडीआरएफ, सैनिकों, पत्रकारों, इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों व जनजागरण में लगे नागरिकों के लिए विशेष आहूतियां समर्पित की जा रही हैं। बुधवार को गायत्री परिजन भीम सिंह अधिकारी ने बताया कि गायत्री प्रज्ञापीठ से नागरिकों से घर पर ही रहने, सोशल डिस्टेंस का गंभीरता से पालन करने की गई है। साथ ही नवरात्रि में श्रद्धालुओं से घर पर ही साधना प्रार्थना करने की अपील की है। इस दौरान परिजन अपने घरों में जौं, तिल, गुड़, घी, गिलोय के माध्यम से गायत्री मंत्र व महामृत्युंजय मंत्र की आहूति के साथ यज्ञ कर सकते हैं।

भिकियासैंण के काली मंदिर में सुनसानी

भिकियासैंण। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन भी मां के भक्तों ने घरों में ही पूजा पाठ कर माता का ध्यान किया। लॉकडाउन के चलते नगर के त्रिवेणी समीप आदि शक्ति काली मंदिर में सुनसानी रही। अन्य वर्ष चैत्र नवरात्र में यहां भक्तों की लंबी कतार रहती थी। इसी तरह अन्य मंदिरों में भी लोग कोई अनुष्ठान नहीं कर रहे हैं।

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