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देश: जानें किस वजह से कांग्रेस नीत विपक्षी दलों की बैठक से गायब रही सपा-बसपा

विपक्षी दलों की इस एकता को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब सोमवार की दोपहर बैठक से छह दलों ने किनारा किया। कांग्रेस की अगुवाई में हुई विपक्षी दलों की बैठक से शिवसेना, आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), डीएमके, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (BSP) का कोई भी नुमाइंदा शामिल नहीं हुआ। इस बैठक में एनसीपी, आरजेडी समेत 20 दलों के लोगों हिस्सा लिया। 

सपा और बसपा के मीटिंग में नहीं शामिल होना यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की दृष्टि से कांग्रेस के लिए चिंता की बात साबित हो सकती है। दोनों पार्टी के नेताओं का कहना है कि वर्तमान समय में उनके लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों एक समान है।

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘उनकी पार्टी अब कांग्रेस से खुद को अलग करना चाहती है।’ सपा नेता ने आगे कहा कि हमारी पार्टी का मानना है कि आज यूपी की इस स्थिति के लिए जितनी बीजेपी जिम्मेदार है उतनी ही कांग्रेस पार्टी।

बता दें कि बीते विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस साथ चुनाव लड़ी थी। वहीं, लोकसभा में सपा और बसपा का गठबंधन था।

वहीं, बीएसपी नेता प्रितेष राजभर ने बताया, ‘आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है। इसी को देखते हुए हुए मायावती ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कई नेताओं को निर्देश दिए गए।’ बीएसपी का भी मानना है कि यूपी के ताजा हालात के लिए बीजेपी और कांग्रेस सामान रूप से जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के हालिया राजनीतिक गतिविधियों के कारण बीएसपी में शक की स्थिति उत्पन्न हुई हो। 

ज्ञात हो कि कांग्रेस महासचिव प्रियंक गांधी ने हाल ही में यूपी का ताबरतोड़ दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने सीएए और एनआरसी को लेकर हुई हिंसा के पीड़ितों से भी मिलीं। इतना ही नहीं, उन्होंने भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद को भी समर्थन दिया। शायद यह बात बीएसपी को खटक गई हो।

कांग्रेस को यह उम्मीद थी कि मायावती की बीएसपी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी से जरुर कोई प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होगा। मायावती ने विपक्षी दलों की बैठक में न जाने के फैसले से पहले कई ट्वीट किए। इन ट्वीट्स में मायावती ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि राजस्थान में गहलोत सरकार को बाहर से समर्थन देने के बावजूद उनके विधायकों को लालच दिया गया। मायावती ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी दलों की बैठक में इस परिस्थिति में जाने का मतलब होगा राजस्थान में पार्टी नेताओं के मनोबल का गिराना।

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