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देश: जेएलएनएमसीएच में एमसीआई निरीक्षण के दौरान गायब 21 डॉक्टरों पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

भागलपुर के मायागंज अस्पताल या जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जेएलएनएमसीएच में एमसीआई निरीक्षण के दौरान गायब रहे 21 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक रही है। पटना के सूत्रों की मानें तो शोकॉज के बाद तय तिथि के अंदर जवाब देने वाले डॉक्टरों के खिलाफ माइनर तो निर्धारित तिथि के बाद जवाब देने या फिर न देने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।


 

जेएलएनएमसीएच को एमबीबीएस में 100 सीट की स्थायी मान्यता नहीं मिली


एमबीबीएस में 100 सीट की स्थायी मान्यता के दावे को लेकर बीते साल चार नवंबर को राजकीय मेडिकल कॉलेज महाराष्ट्र के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस मोरे, डॉ. फखरूद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल की डॉ. वीणा बरुआ, अजमेर मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजेश पाठक ने बतौर एमसीआई इंस्पेक्टर जेएलएनएमसीएच का निरीक्षण किया था। टीम द्वारा किये गये फिजिकल वेरिफिकेशन में जेएलएनएमसीएच के दो विभाग के अध्यक्ष समेत 21 डॉक्टर अनुपस्थित पाये गये थे। इनके अनुपस्थित होने के कारण फैकल्टी की कमी का आंकड़ा 12.93 प्रतिशत पर पहुंच गया था। इसका परिणाम यह हुआ कि आठ दिसंबर 2019 को एमसीआई द्वारा भेजे गये पत्र में जेएलएनएमसीएच को एमबीबीएस में 100 सीट की स्थायी मान्यता नहीं मिली।

एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया था


इसकी जानकारी जब पटना में बैठे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को हुई तो दिसंबर के आखिरी सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव विवेकानंद ठाकुर ने एमसीआई निरीक्षण में अनुपस्थित मिले सभी 21 डॉक्टरों को शोकॉज करते हुए जेएलएनएमसीएच के प्राचार्य के जरिये एक सप्ताह में गायब होने का स्पष्टीकरण मांगा था।

12 डॉक्टरों ने ही दिया था जवाब


सरकार व सिस्टम के प्रति सम्मान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इतना कुछ होने के बावजूद 21 में से महज 12 डॉक्टरों ने ही प्राचार्य को अपना जवाब दिया, जिसे प्राचार्य ने अवर सचिव स्वास्थ्य को भेज दिया। स्वास्थ्य सूत्र बताते हैं कि जवाब न देने वाले डॉक्टर कार्रवाई से बचने के लिए व्यक्तिगत स्तर से अपना जवाब अवर सचिव, स्वास्थ्य को भेज दिये हैं। 

12 डॉक्टरों ने मेरे जरिये जवाब दिया जबकि अन्य अपने स्तर से जवाब दे रहे हैं। रही बात कार्रवाई की तो मुझे नहीं मालूम कि कार्रवाई होगी कि नहीं। अगर होनी भी होगी तो प्रधान सचिव स्वास्थ्य व एडिशनल सचिव स्वास्थ्य द्वारा ही एक्शन लिया जा सकता है। – डॉ. हेमंत कुमार सिन्हा, प्राचार्य, जेएलएनएमसीएच, भागलपुर

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