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देश: दूरसंचार कंपनियों में बैंकों का 91 हजार करोड़ फंसा: रिपोर्ट में खुलासा

उच्चतम न्यायालय की ओर से दूरसंचार कंपनियों को राहत नहीं मिलने के बाद बैकिंग क्षेत्र के लिए संकट खड़ा हो गया है। सरकारी से निजी क्षेत्रों के बैंकों का करीब 91 हजार करोड़ रुपये का बकाया दूरसंचार कंपनियों पर है। यूबीएस ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। विश्लेषक विशाल गोयल और इशांक कुमार द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर, 2019 तक बैंकों का करीब 1.1 खरब रुपये या कुल लोन का 1.3 फीसदी दूरसंचार क्षेत्र में है। 

बैंकों में एसबीआई, पीएनबी, यस बैंक और इंडसइंड बैंक ने सबसे अधिक लोन दूरसंचार कंपनियों को दिया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जियो के आने से बाद से एयरटेल, वोडा-आइडिया सहित दूसरी कंपनियों की कमाई में बड़ी कमी आई है। वहीं, कर्ज का बोझ बढ़ा है। इस फैसले से कंपनियों की वित्तीय स्थिति और खराब होगी। इसका असर बैंकों के कर्ज पर होगा। बैंकों का कर्ज फंस सकता है।

कंपनियों को राहत देने पर विचार


उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रुपये के वैधानिक बकायों की रकम 23 जनवरी तक जमा करने आदेश दिया है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सरकार दूरसंचार कंपनियों की ओर से बकाया रकम चुकाने में समयसीमा बढ़ाने की मांग पर विचार कर सकती है। एक स्वतंत्र समिति कंपनियों की मांग पर विचार कर सकती है लेकिन वह तक जब कंपनियां कुछ राशि का भुगतान तुरंत कर दें। आर्थिक सुस्ती के दौर में यह राशि राजस्व संग्रह बढ़ाने में अहम योगदान देगी।

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