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देश: देश में पहली बार: निर्भया के गुनहगारों को फांसी के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा

फांसी के बाद निर्भया के चारों दोषियों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। यह पहला मौका है, जब फांसी के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि फांसी की तारीख से एक दिन पहले जेल अधिकारी, डाक्टरों की टीम, एसडीमए फांसी घर का मुआयना करेंगे। डॉक्टरों की टीम जल्लाद को हिदायत देगी कि दोषियों की लंबाई के हिसाब से रस्सी की लंबाई रखे। जेल सूत्रों का कहना है कि फांसी के दौरान दोषी की गर्दन में झटका ना लगे, इसके लिए फंदा लगाने के बाद शरीर को कुंए में धीरे-धीरे छोड़ा जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि तिहाड़ में अंतिम फांसी अफजल गुरु को दी गई थी और उसका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था। शव को जेल में ही दफनाया गया था। इससे पहले रंगा-बिल्ला, सतवंत सिंह सहित जितने भी दोषियों को फांसी दी गई है, उनके पोस्टमार्टम नहीं कराए गए थे। हालांकि, अब नए जेल नियम के मुताबिक दोषियों का पोस्टमार्टम कराना होगा। याद रहे कि निर्भया मामले में अदालत ने 22 जनवरी की सुबह 7 बजे चारों दोषियों की फांसी की सजा तय की है।

2 दोषियों की क्यूरेटिव पेटिशन पर SC में सुनवाई

निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में दोषियों को मिली मौत की सजा के खिलाफ दो क्यूरेटिव पेटिशन पर सुप्रीम कोर्ट में 14 जनवरी को सुनवाई होगी। पांच सदस्यीय बेंच दोषी विनय शर्मा और मुकेश की क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई करेगी। इस बेंच में जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं।

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बीते मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत ने मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया और कहा कि उन्हें 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। दोषी मुकेश और विनय की क्यूरेटिव याचिका  पर 14 जनवरी को दोपहर एक बजकर 45 मिनट पर सुप्रीम कोर्ट में इन-चैम्बर सुनवाई होगी।

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गौरतलब है कि दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने एक चलती बस में 23 वर्षीय निर्भया का सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था। इस घटना की निर्ममता के बारे में जिसने भी पढ़ा-सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस घटना के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था।

क्या है क्यूरेटिव पिटिशन

क्यूरेटिव पिटिशन(क्यूरेटिव याचिका) तब दायर किया जाता है जब किसी मामले के दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटिशन ही उस दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है, जिसके जरिए वह अपने लिए पहले से तय की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता है। खास बात है कि क्यूरेटिव पिटिशन किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होता है। क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई होने के बाद दोषी के लिए कानून के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। 

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