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देश: निर्भया केस: दोषी मुकेश की तत्काल सुनवाई वाली याचिका पर SC बोला- अगर किसी को फांसी दी जा रही है तो इससे ज्यादा जरूरी कुछ नहीं

निर्भया रेप और मर्डर केस में मौत की सजा पाने वाले दोषी मुकेश ने राष्ट्रपति के दया याचिका ठुकराने के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने दोषी मुकेश के वकील से कहा कि वह शीर्ष अदालत के सक्षम अधिकारी के समक्ष सोमवार को ही याचिका का उल्लेख करें। दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को फांसी दी जाने वाली है तो इससे (सुनवाई से) अधिक जरूरी कुछ नहीं हो सकता ।


 

2012 Delhi gang-rape case: SC asks counsel of Mukesh,one of the convicts in the case, to approach SC Registry for urgent listing of his plea against rejection of mercy petition by the President.Bench headed by CJI says,if somebody is going to be executed on Feb1,it’s top priority pic.twitter.com/kfIJebVuDn

— ANI (@ANI) January 27, 2020

निर्भया की मां बोलीं, एक फरवरी को दोषियों को फांसी हो ही जाए

मध्यप्रदेश के इंदौर पहुंची निर्भया की माता आशादेवी ने अपनी वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बीते 7 वर्ष में उन्हें कई बार हताशा-निराशा का सामना करना पड़ा है। वे व्यवस्था से अपील करती है कि आगामी एक फरवरी को दोषियों को फांसी हो। आपको बता दें कि दिल्ली की अदालत ने निर्भया केस के सभी दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है जिसके मुताबिक, सभी को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी की सजा दी जानी है।

उन्होंने संवाददाताओं से निर्भया के दोषियों को माफ किए जाने को लेकर उठ रही आवाजों से जुड़े प्रश्न का जवाब देते हुये कहा कि बीते 7 वर्ष से वे अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रही है। उन्होंने कहा क्रूरतम अपराध सामूहिक दुष्कर्म के बाद मौत से लड़ती उनकी बेटी की आखिर क्या गलती थी। उन्होंने कहा कि जिंदगी की जंग लड़ती उनकी बेटी को उन्होंने तड़पते-मरते हुए देखा है। ऐसी वेदना से ईश्वर सबको दूर रखें। आशा देवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीते 7 वर्षों में कोई मानव अधिकार का नुमाइंदा उनसे नहीं मिला है। उन्हें तारीख पर तारीख मिल रही है। अब आगामी एक फरवरी को सभी दोषियों को फांसी मिले, इससे निर्भया को इंसाफ मिलेगा।

निर्भया के गुनहगारों की पैंतरेबाजी जारी

निर्भया के गुनहगारों की पैंतरेबाजी लगातार जारी है। निर्भया के दो दोषिया ने दिल्ली की अदालत में एक याचिका दाखिल कर कहा था कि जेल के अधिकारी वे दस्तवेज मुहैया नहीं करा रहे हैं जो दया तथा सुधारात्मक याचिकाएं दायर करने के लिए जरूरी हैं। इस पर अदालत ने दोषियों के वकील की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि अर्जी पर आगे किसी दिशा-निर्देश की आवश्यकता नहीं है।

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