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देश: मुस्लिम महिला के शव का हिन्दू परिवार ने किया दाह संस्कार, जानें धर्मगुरु ने कैसे सुलझाया विवाद

हैनीमैन चौराहे के पास एक निजी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में महिलाओं के शव बदलने का विवाद शिया धर्म गुरु कल्बे सादिक की पहल पर सुलझ गया। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार कर दिया गया, तो भी राख या हड्डी का कुछ हिस्सा दफन कर फातिहा पढ़ दिया जाए। यह बात मुस्लिम परिवार को समझ में आ गई और सारा विवाद खत्म हो गया। यह बात जानकारी में आने पर पुलिस कमिश्नर ने भी धर्मगुरु की तारीफ की।

सहारा अस्पताल के पोस्टमार्टम गृह पर दो महिलाओं के शव रखे थे। हिन्दू परिवार के लोग अर्चना गर्ग नाम की महिला की अस्पताल में मौत होने पर शव लेकर चले गए और दाह संस्कार कर दिया था। यही नहीं हिन्दू परिवार उनकी अस्थियां लेकर गुरुवार को प्रयागराज संगम के लिए रवाना हो चुका थे। इसी बीच मिर्जा परिवार के सदस्य इशरत का शव लेने गुरुवार (13 फरवरी) को अस्पताल पहुंचे। शव देखकर उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया। बताया कि शव इशरत का नहीं है।

यह सुनते ही अस्पताल प्रशासन के अफसरों ने तुरंत ही गर्ग परिवार के सदस्यों से संपर्क साधा। जब अस्पताल के अफसरों को पता चला कि गर्ग परिवार ने दाह संस्कार कर दिया है तो उनके होश उड़ गए। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद गर्ग परिवार इशरत का दाह संस्कार करने के बाद बीच रास्ते से ही अस्थियां लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां से अर्चना का शव ले लिया। गर्ग परिवार ने अर्चना का शव लेकर औपचारिकता पूरी कर ली है।

इस मामले को लेकर विभूतिखंड पुलिस के सामने काफी देर तक पंचायत भी हुई थी। पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय का कहना है कि धर्मगुरु की पहल सराहनीय है। पुलिस कमिश्नर ने कल्बे सादिक से बात करने का प्रयास किया लेकिन उनके अस्पताल में भर्ती होने की वजह से सम्पर्क नहीं किया जा सका।

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