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देश: राजनीति के अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का बिहार में राजनीतिक दलों ने किया स्वागत

राजनीतिक दलों ने राजनीति के अपराधीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो आपराधिक पृष्ठभूमि के जन प्रतिनिधि हैं उनका क्रिमिनल रेकार्ड वेबसाइट पर अपलोड करें, हालांकि बिहार के राजनीतिक दलों में फिलहाल सूची बनाने को लेकर कोई तैयारी नहीं दिख रही।

यह गंभीर मसला, दल के भीतर बात होना बाकी


प्रदेश जदयू अध्यक्ष व सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि आपराधिक छवि के लोगों के राजनीति में प्रवेश के लिए नियंत्रण की यह पहल अच्छी है। राजनीति की छवि साफ रहे इसको लेकर कोर्ट के साथ ही राजनीतिक दलों को भी प्रयास करना होगा। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार आरंभ से ही इस बात पर अडिग हैं कि वे क्राइम, करप्शन और कम्यूनिलिज्म से कभी समझौता नहीं कर सकते। हमारा दल इसे केन्द्र में रखकर काम करता है। हालांकि सूची को लेकर श्री सिंह ने कहा कि अभी इसपर राय-मशविरा करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वैसे यह गंभीर मसला है क्योंकि राजनीतिक दांव-पेंच में भी जनप्रितिनिधि मुकदमा झेलते हैं। देखना होगा कि किसी पर चार्ज है तो वह कैसा और किन कारणों से है।

भाजपा करेगी अध्ययन


उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि पटना लौटने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन करूंगा। तब आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

राजद में नहीं चल रही है कोई तैयारी


दागी जन प्रतिनिधियों की सूची सौंपने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मामले में राजद की कोई तैयारी गुरुवार तक नहीं दिखी। पार्टी के अधिसंख्य नेता इस मामले से या तो अवगत नहीं हैं या फिर इस मसले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं दिखे। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव कमरे आलम ने कहा कि वह ना तो दिल्ली में हैं और ना ही पटना में। ऐसे में इस मामले से वह अवगत नहीं हैं। दिल्ली पहुंचने पर कुछ बात होगी। उधर प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा कि वह अभी दूसरे काम में लगे हैं। इस मसले पर शुक्रवार को कुछ बता पाएंगे।

कांग्रेस तैयार हैं, पारदर्शिता के साथ एक्शन हो


प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायलय के न्याय-निर्णय का कांग्रेस पालन करने को तैयार हैं किंतु सिर्फ वेबसाइट पर डालने से क्या होगा। इस पर पारदर्शिता के साथ एक्शन (कार्रवाई) हो। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी उम्मीदवार पहले भी आपराधिक मामलों, संपत्ति का ब्यौरा सहित तमाम जानकारियां देते हैं। अब, अगर सर्वोच्च न्यायालय भी यही चाहती है तो पिछले संसदीय चुनाव से ही सूचिता व कार्रवाई शुरू की जाए।

झूठे मुकदमों में फंसाने वाले मुकदमों से बचाव भी हो


भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि अदालत के इस निर्णय से इस बात की पूरी आशंका रहेगी कि शासक दल विपक्षी नेताओं को झूठे मुकदमों में न फंसा दे। इसलिए जनांदोलनों में भाग लेने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को गलत तरीके व मनमाने ढंग से केस में फंसाने से बचाव का भी स्पष्ट प्रावधान रहे। कहा कि पार्टी शुरू से राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ रही है। पर यह देखना पड़ेगा कि सरकार इस फैसले को सत्ता में बने रहने के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं करे।


 

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