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देश: लॉकडाउन: ‘न काम है, न ही गांव लौटने का साधन, रैन बसेरे में खाना तो मिल रहा’

लॉकडाउन के बाद दिल्ली के उन लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है जो रोजाना कमाते और खाते थे। काम नहीं मिलने की वजह से खाने-पीने की दिक्कत हो गई है। इतने पैसे भी नहीं बचे कि दुकानों से जरूरत भर का राशन खरीद सकें। रैन बसेरे ऐसे लोगों का सहारा बने हैं। रैन बसेरे और समाज के इस तबके पर हिन्दुस्तान की रिपेार्ट…

सराय काले खां बस अड्डे के विपरीत यमुना नदी के किनारे दिल्ली सरकार का रैन बसेरा बना हुआ है। यहां लोग बिस्तरों पर लेटे हैं और वहां चल रही टीवी देख रहे हैं। हर कोई एक-दूसरे से दूरी बनाकर लेटा हुआ है, हालांकि वह दूरी कम पड़ रही है। कई लोग रैन बसेरे के बाहर खड़े हैं, वह खाने का इंतजार कर रहे हैं। औरंगाबाद के बछेती गांव के रहने वाले रमेश ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। निर्माण वाली साइट पर ही रहते थे। कामबंदी होते ही ठेकेदार ने कहा कि गांव चले जाओ।

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बसअड्डे पर पता चला कि बस भी नहीं चल रही है। अब न रहने की जगह है और न ही गांव जाने के लिए साधन। इसलिए यहां रैन बसेरे में रह रहे है। अब कम से कम यहां खाने व रहने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि दोपहर और रात को यहां खाना मिलता है। हालांकि खाने के समय यहां भीड़ बढ़ जाती है। खाना ले रहे कई लोगों ने बताया कि वह यहां रहने नहीं है लेकिन खाना लेने के लिए यहां आ जाते हैं।

बंगला साहिब का लंगर बंद होने से बढ़ गई भीड़

कनॉट प्लेस स्थित बाबा खड्ग सिंह मार्ग पर स्थित हनुमान मंदिर के पास बने रैन बसेरों में रह रहे सीतापुर के गांव भदैना के रहने वाले रामसनेही ने बताया कि यही इलाके में रिक्शा चलाता था। अब कामधंधा बंद है तो खाने के भी लाले पड़ गए हैं। घर जाने का भी कोई जुगाड़ नहीं है तो अब रैन बसेरे में रह रहे हैं। हनुमान मंदिर में इन दिनों रोज की तुलना में भीड़ बढ़ी है। यही पास ही बंगला सहिब गुरुद्वारा है। वहां लंगर बंद होने के कारण इसके आस-पास रहने वाले गरीब लोग भी खाने-पीने के लिए बड़ी संख्या में आ रहे है। रैन बसेरे की देखरेख कर रहे संचालक ने बताया कि खाना बांटते समय सबकी लाइन लगाते हैं, उसमें सबको दूर-दूर खड़ा किया जाता है। कोशिश रहती है एक-एक करके सबको खाना दिया जाए।

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खाना बांटने के लिए स्टॉल बढ़ेंगे

दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के सदस्य विपिन राय ने बताया कि रैन बसेरों में लाकडाउन की वजह से भीड़ बढ़ गई है। इसमें ज्यादातर बेघर लोग या फिर दिहाड़ी पर काम करके रोज कमाने वाले लोग शामिल है। भीड़ बढ़ने की वजह से सोशल डिस्टेंस बना रहे रैन बसेरा संचालकों को इसके निर्देश जारी किया है। लोग एक-एक मीटर की दूरी बनाकर सोएंगे। खाना बांटते समय लोगों को लाइन में दूरी बनाकर खड़ा होना होगा। खाना मिलता है इसकी वजह से लोगों की भीड़ बढ़ रही है। इस लेकर हम भी चिंतित है। इसलिए खाना बांटने वाले स्टाल की संख्या बढ़ाने पर काम चल रहा है।

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