हरिद्वार

श्री टाटवाले बाबा को श्रद्धांजलि दी

वेदांत वेत्ता श्रीश्री टाट वाले बाबा के वार्षिक श्रद्धांजलि समारोह में दूसरे दिन भक्ति एवं वेदांत की गंगा प्रवाहित हुई। स्वामी अखंडानंद ने कहा की वेदांत का अर्थ ही है भेद का अंत होना है। जो सच को अपना लेता है वह सच स्वरूप ही हो जाता है।

स्वामी विजयानंद ने गुरु के बारे में कहा कि हम जैसा ध्यान करते हैं। वैसे ही बन जाते हैं गुरु का वाक्य ही अकाट्य होता है। श्रद्धा वान को ही ज्ञान की प्राप्ति होती है अंहकार से मनुष्य का जीवन दूभर हो जाता है। यह गुरु की महिमा है कि वह अपने शिष्य को अद्वैत रूप में नहीं छोड़ते हैं। डॉ हरिहरानंद ने कहा की टाट वाले बाबा इस सदी के विलक्षण संतों में से एक थे। स्वामी रविदेव शास्त्री द्वारा गुरु की महिमा का बखान करते हुए समस्त उपस्थित भक्त जनों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने स्वरूप को पहचानना ही वेदांत का परम उद्देश्य है। टाट वाले बाबा के शिष्य हरिहरानंद द्वारा गुरु की महिमा का बखान किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार बत्रा, रचना मिश्रा, एसके बोहरा, विजय शर्मा, सुनील सोनेजा, संजय कुमार बत्रा, विनोद अरोड़ा, मधु गौड़, महेशी देवी, आनंद सागर, उदित गोयल आदि शामिल थे।

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