हल्द्वानी

हल्द्वानी: बुरा प्रभाव घकम करने को

कलश स्थापना के साथ नवरात्र के पहले बुधवार को मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना हुई। दूसरे दिन गुरुवार को घरों में मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की गई। श्री महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. नवीन जोशी ने बताया कि लोगों ने घरों में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की। मदिरों में सुबह नित्य पूजन के बाद उन्हें बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है। विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है। माता की भक्ति से व्यक्ति में तप की शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य जैसे गुणों में वृद्धि होती है। चुनरी के साथ थाली में मास्क भीगुरुवार को बाजार में नवरात्र की खरीदारी करते हुए कुछ महिलाएं दिखीं। जिन ठेलों में पूजा सामाग्री और माता की चुनरी थी, वहीं मॉस्क की बिक्री भी कर रहे थे। श्रद्धालु की थाली में पूजा सामग्री के साथ मास्क भी था। हालांकि कोरोना के चलते शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में कोई नहीं जा रहा है।

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