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अग्रिम पंक्ति के शूटर थे शहीद वीरेंद्र

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अग्रिम पंक्ति के शूटर थे शहीद वीरेंद्र 2

पुलवामा में शहीद वीरेंद्र सिंह सीआरपीएफ की अग्रिम पंक्ति के शूटर थे। अचूक निशानेबाज शहीद वीरेंद्र बटालियन की पेट्रोलिंग में सबसे आगे रहते थे। फुर्तीले होने की वजह से वह 2012 में छत्तीसगढ़ में आईईडी ब्लास्ट की घटना में चार कमांडेंट और चालक के साथ सुरक्षित बच निकले थे, जबकि उन्होंने नक्सली बेस कैंप को ध्वस्त कर दिया था।  शहीद वीरेंद्र के घर परिजनों को ढाढ़स बधाने पहुंचे साथी लखीमपुर खीरी निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि वीरेंद्र साहसी थे। वह भुवनेश्वर (उड़ीसा) में ट्रेनिंग के बाद 2012 तक एक यूनिट में साथ रहे। राजेंद्र कुमार ने बताया कि 2005 से वह अरुणाचल प्रदेश के सीएम हाउस में तैनात थे।

इसी दौरान 2006 में वीरेंद्र को 2008 तक विशेष ट्रेनिंग सेंटर में अग्रिम पंक्ति के शूटर के रूप में प्रशिक्षित किया गया था।  राजेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने 2006 में असोम और 2018 में हैदराबाद में एक साथ कोर्स किया था। अंतिम विदाई में पहुंचे सीआरपीएफ के डीआईजी प्रदीप चंद्र और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी अर्जित शंकर, असिस्टेंट कमांडेंट मुकेश पीपी ने भी शहीद को सीआरपीएफ का बेहतर जांबाज बताया।

तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने किया था सम्मानित
2008 में सीआरपीएफ की 170 बटालियन छत्तीसगढ़ में कमांडेंट राकेश राव के साथ रहकर उन्होंने नक्सलियों के कई बेस कैंपों को ध्वस्त किया था। शहीद वीरेंद्र के अदम्य साहस की वजह से ही 2010 में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने उन्हें सम्मानित किया था।

मानवाधिकार उल्लंघन में कोर्ट ने निर्दोष करार दिया
मानवाधिकार उल्लंघन के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तत्कालीन कमांडेंट राकेश राव और वीरेंद्र को निर्दोष करार दिया था। 2012 में वीरेंद्र ग्रुप सेंटर काठगोदाम में भी तैनात रहे। जुलाई 2018 में उन्होंने 45वीं बटालियन में रहते हुए हैदराबाद में ट्रेनिंग की। यह ट्रेनिंग आर्मी के अलावा अब पैरामिलिट्री फोर्स को भी दी जाती है।

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